क्या बच्चे रोने से खुद को चोट पहुंचा सकते हैं?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:30

जन्म के समय क्यों रोते हैं बच्चे, रोने से होता है उनकी सेहत पर असर
बच्‍चे के रोना से होता है उसकी सेहत पर असर-
Why Do Babies Cry At Birth-जन्‍म के बाद हर बच्‍चा रोता है या उसे जबरदस्‍ती रुलाया जाता है. जो बच्‍चा खुद से नहीं रोता डॉक्‍टर उसे रुलाने के लिए पीठ पर थपथपाते हैं या गले की सफाई करते हैं. माना जाता है कि नवजात शिशु का दिन में दो से तीन घंटे रोना जरूरी है.


Why Do Babies Cry At Birth- जन्‍म देना किसी भी मां के लिए आसान नहीं होता. असहनीय दर्द सहने के बाद जब मां बच्‍चे के रोने की आवाज सुनती है तो उसका सारा दर्द खुशी में बदल जाता है. जन्‍म के बाद हर बच्‍चा रोता है या उसे जबरदस्‍ती रुलाया जाता है. जो बच्‍चा खुद से नहीं रोता डॉक्‍टर उसे रुलाने के लिए पीठ पर थपथपाते हैं या गले की सफाई करते हैं. माना जाता है कि नवजात शिशु का दिन में दो से तीन घंटे रोना जरूरी है. कई जगहों पर बच्‍चे के रोने को शुभ माना जाता है. अब सवाल ये उठता है कि जन्‍म के बाद बच्‍चा क्यों रोता है या बच्‍चे का रोना क्‍यों जरूरी है. क्‍या बच्‍चे का रोना उसकी सेहत से जुड़ा है. चलिए जानते हैं जन्‍म के बाद बच्‍चे का रोना क्‍यों है जरूरी.

बच्‍चों का रोना क्‍यों है जरूरी
बच्‍चे का रोना उसके जीवित और स्‍वस्‍थ होने का संकेत देता है. हेल्‍थलाइन के अनुसार जन्‍म के बाद बच्‍चे का रोना जरूरी होता है. इससे उसके स्‍वस्‍थ होने का पता चलता है. इसे फर्स्‍ट क्राई के नाम से जाना जाता है. नौ महीने गर्भ में रहने के बाद जब बच्‍चा मां की कोख से बाहर आता है तो उसके लिए अलग वातावरण में सांस लेना काफी मुश्किल होता है जिस वजह से बच्‍चा रोता है. एक्‍सपर्ट का मानना है कि बच्‍चे के रोने से उसके लंग्‍स और हार्ट सही काम कर रहे हैं उसका संकेत मिल जाता है.


बच्‍चे की रोने की गति से लगता है अंदाजा
बच्‍चे का रोना उसकी हेल्‍थ को दर्शाता है. यदि बच्‍चा जन्‍म के बाद तेजी से रोए तो स‍मझिए वह बिल्‍कुल स्‍वस्‍थ्‍य है. वहीं बच्‍चा यदि धीमी गति या आवाज में रोता है जिसका मतलब है उसे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी परेशानी हो सकती है. गर्भ में रहने के दौरान बच्‍चा अम्‍बिलिकल कॉर्ड से सांस लेता है. बाहर आकर जब बच्‍चा खुद से सांस लेने की कोशिश करता है तब उसकी सांस नली व मुंह से फ्लूइड बाहर निकलते हैं. जब ये फ्लूइड बाहर नहीं निकल पाता तो सक्‍शन ट्यूब की मदद से इसे बाहर निकाला जाता है. जिसके बाद बच्‍चा रोता है. कई मामलों में बच्‍चे का न रोना उसकी मौत का कारण भी हो सकता है.


मां से स्‍पर्श से मिलती है राहत
बच्‍चा नौ महीने मां की कोख में सुरक्षित रहता है. जन्‍म के बाद उसे बाहर के वातावरण में एडजस्‍ट करने में काफी समय लग जाता है. कई बार बच्‍चे जन्‍म के 24 घंटे तक शांत रहते हैं. नए माहौल से बच्‍चा डरता है ऐसे में मां का स्‍पर्श बच्‍चे को राहत दे सकता है. यही वजह है कि जन्‍म के बाद सबसे पहले बच्‍चे को मां के हाथों में दिया जाता है. तभी मां पहला ब्रेस्‍टफीड कराती है जो कि बच्‍चे को ताकत देता है और इम्‍यूनिटी बूस्‍ट करने का काम करता है.

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